मोदी के मुंह से यह क्या निकल रहा है? एक के बाद एक वे ऐसे शिगूफे छोड़ रहे हैं जिसके लिए उन्हें दोषी तो नहीं ठहराया जा सकता अलबत्ता उसका मतलब निकालकर लोग बहस खूब कर सकते हैं। इस उद्देश्य में वे सफल भी रहे हैं। कांग्रेस, सपा, बसपा ने मोदी का फेंका चारा निगल लिया है और बस अब कांटे का उनके गले में उतरना बाकी रह गया है। दरअसल इस खेल की शुरुआत खुद कांग्रेस ने की है किन्तु अब इसमें मास्टरी मोदी को हो गई है। कांग्रेस ने अंग्रेजों की सोहबत में राजनीति सीखी थी। उनका तरीका था किसी देश को छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ दो और फिर उनकी साहूकारी करो। कांग्रेस ने इसी ढर्रे को अपनाया। अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, आदिवासी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति.. न जाने कितनी तरह के वर्ग पैदा कर लिए। इस लिफाफेबाजी में एक बहुत बड़ा वर्ग, सवर्णों का छूट गया। आरएसएस की इस सवर्ण वर्ग पर लंबे समय से नजर थी। बस उन्हें कोई ऐसा नेता नहीं मिल रहा था जो उनके सिखाए को तोते की तरह दोहरा सके। वाजपेई खुद एक बुद्धिमान व्यक्ति थे, आडवाणी भी अपने स्टेटस की चिंता करने लगे थे। इसलिए जो वाजपेई या आडवाणी के रहते संभव नहीं था, उसे मोदी संभव बना रहे हैं। इसलिए मोदी जब दंगों में मारे गए लोगों के बारे में कहते हुए दंगों में मारे गए लोगों की तुलना सड़क पर गाड़ी के नीचे आने वाले पिल्ले से करते हैं तो उसपर हायतौबा मचती ही है। मोदी या मोदी का भाषण बुनने वालों को भली भांति पता है कि इसका कौन क्या मतलब निकालेगा और कौन क्या कहेगा। अभी इसकी आंच कम भी नहीं हुई थी कि धर्मनिरपेक्षता के बुर्के के रूप में उन्होंने दूसरा फिकरा उछाला। एक बार फिर सेकुलर लोगों ने चारा लपक लिया। हिंदी के शोहदे आम तौर पर चीजों पर खाक डाला करते हैं, कंबल ओढ़ाया करते हैं। पर मोदी के भाषण में इन साधारण शब्दों या उपमाओं का क्या काम? वे तो जानबूझकर ठहरे हुए पानी में कंकड़ मार रहे हैं। बर्र के छत्ते में हाथ दे रहे हैं। मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ रहे हैं। उन्हें पता है कि इसपर जब बहस खुलेगी तो कौन क्या कहेगा। हिन्दुओं को इसमें बुरा कुछ भी नहीं दिखेगा। ठीक ही तो है, गाड़ी के नीचे आकर पिल्ला कुचल जाता है तो कमर्शल ड्रायवर को भी दुख होता है। इसलिए दंगों का मोदी को भी दुख हुआ ही होगा। इसी तरह कांग्रेस के बुर्का ओढ़ने की बात भी हिन्दुओं को गुदगुदा जाएगा। लोग इसे मोदी की दीदादिलेरी ही समझेंगे। वे मोदी के फैन तो हैं ही, उनके मुरीद हो जाएंगे। मोदी सोची समझी योजना के तहत ये भाषण दे रहे हैं। उन्हें पता है कि कांग्रेस के अधिकांश नेताओं के बाल धूप में सफेद हुए हैं। वे बैठे बैठे वरिष्ठ हो गए हैं। अक्ल उनमें धेले की नहीं है। वरना जिन टिप्पणियों पर उसे खामोशी की चादर ओढ़ लेनी चाहिए उसपर वे गलाबाजी कर रहे हैं। मोदी बाउंसर पर बाउंसर दे रहे हैं और कांग्रेसी, बसपाई, सपाई, आदि बल्लेबाजी करने की कोशिश कर रहे हैं। कब मुंह नाक फूट जाए पता नहीं....
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