
देश में कानून व्यवस्था का हाल देखो तो पुलिस पर दया आती है कि बेचारे इतने कम आदमी और संसाधन के साथ कैसे काम करते होंगे। इसलिए जब सड़कों पर, बसों में, झुरमुट में बलात्कार होते हैं तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया यही होती है कि पुलिस हर जगह तो नहीं हो सकती। चोरी चकारी की घटनाओं के बारे में भी यही कहा जा सकता है कि जब लोगों से अपना घर नहीं संभल रहा तो दो-चार सैकड़ा पुलिस वालों से हजारों मकानों की सुरक्षा की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। ऐसा नहीं है कि इन हालातों की जानकारी सरकार को नहीं है किन्तु वह बेतुके फूं-फां के चलते तमाम किस्म की सिरदर्दी मोल लेती है जिसका जमा-खर्च कुछ नहीं है। अब मेट्रो रेल में युवा कपल्स की हरकतों के मामले को ही लें। मेट्रो में सुरक्षा के लिए लगे कैमरों ने इनकी अश्लील हरकतों को रिकार्ड कर लिया। मेट्रो या सीआईएसएफ के किसी कर्मचारी या कर्मचारियों ने उसे विदेशी पोर्न साइट्स को बेच भी दिया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला कायम किया है। अब दूसरा काम जो उसने अपने हाथ में लिया है वह न केवल बेतुका बल्कि गैरजरूरी भी है। वह वीडियो फुटेज में बेजा हरकत कर रहे कपल्स को दिल्ली की डेढ़ करोड़ की आबादी में तलाशेगी। इसके लिए उसे समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की खाक छाननी होगी। इसके बाद भी हासिल आएगा क्या? ज्यादा से ज्यादा आईपीसी की धारा 294 के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। यदि जुर्म साबित हुआ तो अधिक से अधिक तीन माह की सजा और जुर्माना हो सकता है। जेलों की हालत किसी से छिपी नहीं है। और यह कोई जेल जाने लायक हरकत भी नहीं है। मौजूदा हालातों में जितनी बेजा यह हरकत है, उनकी गिरफ्तारी उससे कहीं ज्यादा बेजा हरकत होगी। वैसे भी तय है कि हरकतें एकांत के पलों में हुई होंगी। जब किसी ने देखा ही नहीं होगा तो किसी को आपत्ति कैसे हो सकती है? इसलिए धारा 294 इस मामले में लागू होगी, इसपर भी पर्याप्त शंका है। अगर पुलिस यह काम नहीं भी करेगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बेहतर है पुलिस के उपलब्ध बल को किसी फलदायक कार्य में झोंका जाए ताकि सुरक्षा का माहौल बना रहे।
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