मधुमक्खियों का टीआरपी एकाएक बढ़ गया है। देश की दोनों राजनीतिक पार्टियां मधुमक्खियों पर शोध कर रही हैं। कोई मधुमक्खी को देवता बता रहा है तो कोई यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी से रानी मधुमक्खी की तुलना कर रहा है। दरअसल राहुल गांधी ने इसकी उपमा दी थी। उन्होंने कहा था कि एक व्यक्ति के किये इस देश का कुछ नहीं होने वाला, सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने यह बात सीआईआई के समारोह में कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि कोई अगर ऐसी अपेक्षा करता है कि कोई घोड़े पर सवार होकर आएगा और सबकुछ ठीक कर देगा, तो ऐसा नहीं है। शायद उनका इशारा अंग्रेजी उपन्यास के चरित्र ‘रॉबिन हुड’ की तरफ था। इसके तुरंत बाद से मधुमक्खी का छत्ता हॉट टापिक बन गया है। भाजपा को लगा कि टिप्पणी मोदी को लेकर की गई है। उसने विरोध किया। विरोध किया तो कांग्रेस ने तत्काल कहा, राहुल का आशय मोदी नहीं थे। राहुल यदि मोदी के बारे में कह रहे होते तो भैंसे की उपमा देते। भैंसा यमराज का वाहन है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि मोदी पूरे देश में गोधरा को दोहराना चाहते हैं। मोदी ने कहा था कि उन्होंने गुजरात की माटी का कर्ज उतार दिया है और अब देश की बारी है। वह तो गनीमत हुई कि गोधरा, सिख दंगा पर चर्चा आगे नहीं बढ़ी और मामला मधुमक्खी पर आकर टिक गया। मधुमक्खी पर रिसर्च शुरू हो गया। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि मधुमक्खी एक देवी भी है जिसे भ्रामरी कहा जाता है। उत्तरांचल में इस देवी के मंदिर भी हैं। शोध भाजपा भी कर रही थी। भाजपा ने कहा कि राहुल बाबा ने ठीक ही कहा है। देश एक मधुमक्खी का छत्ता है और सोनिया गांधी रानी मधुमक्खी। हालांकि इस बार सोनिया का नाम नहीं लिया गया। पर यह जरूर कहा गया कि रानी मधुमक्खी खुद कोई काम नहीं करती। काम शेष देशवासी करते हैं जिन्हें साधारण नर मधुमक्खी समझा जा सकता है। यह भी कहा गया कि नर मधुमक्खियों के हाथ कुछ नहीं आता। शहद कोई और पी जाता है। बहरहाल शोध अभी जारी है। आने वाले कुछ दिनों में हमारे नेता मधुमक्खी का कोई और ऐंगल निकाल लाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। तब तक मधुमक्खियां अपने टीआरपी पर इठला सकती हैं।
Sunday, 7 April 2013
रानी मधुमक्खी और सोनिया
मधुमक्खियों का टीआरपी एकाएक बढ़ गया है। देश की दोनों राजनीतिक पार्टियां मधुमक्खियों पर शोध कर रही हैं। कोई मधुमक्खी को देवता बता रहा है तो कोई यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी से रानी मधुमक्खी की तुलना कर रहा है। दरअसल राहुल गांधी ने इसकी उपमा दी थी। उन्होंने कहा था कि एक व्यक्ति के किये इस देश का कुछ नहीं होने वाला, सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने यह बात सीआईआई के समारोह में कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि कोई अगर ऐसी अपेक्षा करता है कि कोई घोड़े पर सवार होकर आएगा और सबकुछ ठीक कर देगा, तो ऐसा नहीं है। शायद उनका इशारा अंग्रेजी उपन्यास के चरित्र ‘रॉबिन हुड’ की तरफ था। इसके तुरंत बाद से मधुमक्खी का छत्ता हॉट टापिक बन गया है। भाजपा को लगा कि टिप्पणी मोदी को लेकर की गई है। उसने विरोध किया। विरोध किया तो कांग्रेस ने तत्काल कहा, राहुल का आशय मोदी नहीं थे। राहुल यदि मोदी के बारे में कह रहे होते तो भैंसे की उपमा देते। भैंसा यमराज का वाहन है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि मोदी पूरे देश में गोधरा को दोहराना चाहते हैं। मोदी ने कहा था कि उन्होंने गुजरात की माटी का कर्ज उतार दिया है और अब देश की बारी है। वह तो गनीमत हुई कि गोधरा, सिख दंगा पर चर्चा आगे नहीं बढ़ी और मामला मधुमक्खी पर आकर टिक गया। मधुमक्खी पर रिसर्च शुरू हो गया। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि मधुमक्खी एक देवी भी है जिसे भ्रामरी कहा जाता है। उत्तरांचल में इस देवी के मंदिर भी हैं। शोध भाजपा भी कर रही थी। भाजपा ने कहा कि राहुल बाबा ने ठीक ही कहा है। देश एक मधुमक्खी का छत्ता है और सोनिया गांधी रानी मधुमक्खी। हालांकि इस बार सोनिया का नाम नहीं लिया गया। पर यह जरूर कहा गया कि रानी मधुमक्खी खुद कोई काम नहीं करती। काम शेष देशवासी करते हैं जिन्हें साधारण नर मधुमक्खी समझा जा सकता है। यह भी कहा गया कि नर मधुमक्खियों के हाथ कुछ नहीं आता। शहद कोई और पी जाता है। बहरहाल शोध अभी जारी है। आने वाले कुछ दिनों में हमारे नेता मधुमक्खी का कोई और ऐंगल निकाल लाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। तब तक मधुमक्खियां अपने टीआरपी पर इठला सकती हैं।
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