Sunday, 7 April 2013

आरोप तय होने से पहले मिले आरोपी को मौका : अदालत


 मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी आरोपी को आरोप तय होने से पहले मामले से मुक्त होने की मांग करने का मौका मिलना चाहिए। न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी ने कहा, मेरा मानना है कि निचली अदालत को याचिकाकर्ता को आरोप पत्र पर सोच-विचार करने और आरोप मुक्त होने के लिए आवेदन करने की इजाजत देनी चाहिए थी। सीधे उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की जरूरत नहीं थी।
अदालत ने रिश्वतखोरी के मामले में वकील मंदर गोस्वामी के खिलाफ तय आरोप को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। गोस्वामी को पिछले साल मार्च में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इसी के साथ पूर्व विधान परिषद सदस्य कन्हैया गिडवानी और उनके बेटे कैलाश, तथा कर सलाहकार जेके जगियासी को भी गिरफ्तार किया गया था।
इन लोगों को आदर्श सोसायटी घोटाले के मामले में गिडवानी परिवार के खिलाफ लगे आरोपों को कमजोर करने के लिए कथित तौर पर घूस लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
गोस्वामी के अनुसार बीते साल 25 अक्तूबर को विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश ने उन्हें सम्मन किया और फिर सूचित किया गया कि उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हो चुका है।
याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी ने तय आरोप को खारिज कर दिया और कहा, मेरा विचार है कि निचली अदालत को इन तथ्यों और परिस्थितियों में फौरन कार्यवाही नहीं करनी चाहिए थी। उच्च न्यायालय ने वकील को आदेश दिया कि वह 10 दिनों के भीतर निचली अदालत के समक्ष आरोपमुक्त होने के लिए आवेदन करें।

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