Sunday, 7 April 2013

एसडीएम और जांच अधिकारी पर मुकदमा चलाने की मांग


नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2013
पत्नी को जलाकर मारने के आरोप से करीब 20 साल बाद बरी हुए व्यक्ति ने एसडीएम और जांच अधिकारी पर मुकदमा चलाने के लिये अदालत में मामला दायर किया है। उसका आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने मृतका का फर्जी मृत्युपूर्व दस्तावेज अदालत में पेश कर उसे फंसाया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने सुभाष की शिकायत रिकार्ड पर लेते हुये 16 अप्रैल को इस पर सुनवाई करने का निश्चय किया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 अगस्त, 2011 को सुभाष को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
निचली अदालत ने सुभाष को अपनी पत्नी रीता को मई 1991 में कथित रूप से जलाकर मार डालने के जुर्म में सितंबर, 1997 में उम्र कैद की सजा सुनायी थी। सुभाष और रीता का विवाह करीब साढ़े सात साल पहले हुआ था और उनके छह साल का एक बच्चा था।
सुभाष ने आरोप लगाया है कि एसडीएम ने अदालत में कहा था कि 19 मई, 1991 को जांच अधिकारी प्रताप सिंह ने अस्पताल में रीता का बयान दर्ज करने के लिये संपर्क किया था जहां वह दोपहर में पहुंचे थे।
जांच अधिकारी प्रताप सिंह ने हालांकि अदालत में कहा कि उन्हें एसडीएम द्वारा रीता का बयान दर्ज करने के बारे में 19 मई, 1991 की शाम को मृतक के पिता का फोन आया था और इसके बाद उसने एसडीएम से रात में ही संपर्क किया। बाद में दोनों बयान दर्ज करने के लिये अस्पताल गये।
पुलिस के अनुसार स्कूल शिक्षिका रीता ने मृत्यु पूर्व दिए अपने बयान में आरोप लगाया था कि उसके पति ने कहासुनी के बाद उस पर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा दी। इस हादसे में बुरी तरह झुलसी रीता की बाद में अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।
सुभाष का कहना है कि इन अधिकारियों के बयानों में ‘महत्वपूर्ण विरोधाभास’ है जो झूठी गवाही देने सहित विभिन्न अपराधों के लिये उन पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त है। उसकी पत्नी का मृत्यु से पूर्व कथित बयान ‘फर्जी दस्तावेज’ है और इसे एसडीएम तथा जांच अधिकारी ने अस्पताल गए बगैर ही तैयार कर लिया था।

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