वैश्विक इकाइयों से मान्यता का प्रयास
स्वतंत्र डिग्री देने की क्षमता होगा लक्ष्य
कोलकाता। विदेशी छात्रों को अपने पाठ्यक्रमों की ओर लुभाने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अब दो वैश्विक इकाइयों से मान्यता तथा व्यवसाय प्रबंधन में डिप्लोमा की बजाय डिग्री प्रदान करने की शक्ति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
आईआईएम कोलकाता के निवर्तमान निदेशक शेखर चौधरी ने कहा, भारतीय प्रबंधन संस्थानों को डिप्लोमा की बजाय डिग्री प्रदान करने में सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, प्रबंधन में आईआईएम के स्नातकोत्तर डिप्लोमा की उद्योग जगत में काफी धाक है, लेकिन डिग्री भारतीय प्रबंधन संस्थानों की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में मदद करेगी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय पहले से ही एक संसद अधिनियम के जरिए भारतीय प्रबंधन संस्थानों को डिग्री प्रदान करने की शक्ति देने पर विचार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि डिग्रियां आईआईएम को विभिन्न तरह के पाठ्यक्रम विकसित करने में व्यापक शैक्षिक लचीलापन उपलब्ध कराएंगी जो आज संभव नहीं है। आईआईएम अब तक प्रबंधन में दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्रदान करते रहे हैं जो एमबीए के बराबर है।
बिजनेस स्कूलों की विशिष्ट श्रृंखला पिछले चार-पांच साल से एसोसिएशन आॅफ कॉलेजिएट स्कूल्स आॅफ बिजनेस (एएसीएसबी) की मान्यता हासिल करने की कोशिश कर रही है।
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